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कानपुर में 'मिनी जामताड़ा'! पुलिस ने फिल्मी अंदाज में ड्रोन से रेकी कर पूरे गांव को घेरा, यूं गिरफ्तार किए 19 साइबर ठग

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Apr 08, 2026 08:00 pm IST,  Updated : Apr 08, 2026 08:01 pm IST

Kanpur Police Operation Jamtara: कानपुर में पुलिस ने बड़ा ऑपरेशन करके एक ही गांव से एक साथ 19 साइबर ठगों को पकड़ लिया है। ये लोग सरकार की योजनाओं का लालच देकर फोन पर ही बैंक अकाउंट और बाकी व्यक्तिगत डेटा ले लेते थे।

kanpur police operation- India TV Hindi
कानपुर में 19 साइबर ठगों को पुलिस ने पकड़ा है। Image Source : REPORTERS INPUT

कानपुर: उत्तर प्रदेश की कानपुर पुलिस ने साइबर क्राइम के खिलाफ फिल्मी अंदाज में कार्रवाई को अंजाम दिया है। रेउना इलाके के एक छोटे से गांव को 'मिनी जामताड़ा' का अड्डा बनाकर चल रहे बड़े साइबर ठगी नेटवर्क को पुलिस ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। भारी पुलिस बल, ड्रोन की मदद से आसमान से निगरानी और चारों तरफ से घेराबंदी यह ऑपरेशन किसी एक्शन थ्रिलर फिल्म के क्लाइमेक्स की याद दिलाता है।

'जामताड़ा' स्टाइल में की ठगी

दरअसल, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि रेउना क्षेत्र के एक गांव में पूरा का पूरा परिवार और युवा साइबर ठगी के धंधे में लिप्त हैं। यहां जामताड़ा स्टाइल की ठगी चल रही थी, जहां अपराधी सरकारी योजनाओं के नाम पर मासूम लोगों को फंसाते थे। लोगों को फोन कर केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का लालच दिया जाता था। इसके बाद उनके व्यक्तिगत डेटा, बैंक खाता विवरण और OTP हासिल कर उनके खातों से लाखों रुपये की लूट की जाती थी। इस गिरोह ने न केवल कानपुर बल्कि आसपास के कई जिलों और अन्य राज्यों के सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाया था।

ड्रोन कैमरों से की इलाके की रेकी

पुलिस ने अपराधियों को किसी भी तरह का मौका न देने के लिए खास रणनीति बनाई। सबसे पहले ड्रोन कैमरों से गांव की पूरी रेकी की गई। हर गली, हर घर और हर मूवमेंट पर नजर रखी गई। जब प्लानिंग पूरी तरह पुख्ता हो गई, तब भारी संख्या में पुलिसकर्मियों ने पूरे गांव को चारों तरफ से घेर लिया। अपराधियों को सरेंडर करने की चेतावनी दी गई। इसके बाद पुलिस ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया और 19 शातिर साइबर ठगों को दबोच लिया।

पुलिस ने ये सबूत किए बरामद

गिरफ्तार आरोपियों में स्थानीय युवा और कुछ अन्य राज्यों से जुड़े लोग शामिल हैं। इनके पास से भारी मात्रा में सबूत बरामद किए गए। इसमें दर्जनों मोबाइल फोन, सिम कार्ड, म्यूल अकाउंट्स (मनी लॉन्ड्रिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले फर्जी बैंक खाते) की डिटेल, फर्जी आईडी प्रूफ, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क सिर्फ स्थानीय नहीं बल्कि अंतरराज्यीय स्तर का है और इसके तार देश के अन्य बड़े साइबर अपराधी गिरोहों से भी जुड़े हो सकते हैं।

सैकड़ों शिकायतों के बाद हुआ एक्शन

एडीसीपी क्राइम सुमित रामटेके ने बताया कि पकड़े गए सभी आरोपियों से कड़ी पूछताछ जारी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि ये ठग मुख्य रूप से सरकारी योजनाओं जैसे पीएम किसान, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना आदि के नाम पर लोगों को कॉल करते थे। फर्जी अधिकारी बनकर डराते-धमकाते और फिर उनके बैंक डिटेल्स हासिल कर ठगी करते थे। अब तक सैकड़ों शिकायतें इस गिरोह से जुड़ी हुई हैं। पुलिस को उम्मीद है कि आज शाम तक इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिसमें कुछ और नाम भी सामने आ सकते हैं।

यह कार्रवाई कानपुर पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच की बेहतर खुफिया जानकारी और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का नतीजा है। ड्रोन का उपयोग करके पुलिस ने अपराधियों की हर गतिविधि पर नजर रखी, जिससे कोई भी आरोपी भाग नहीं सका। इस ऑपरेशन ने साबित कर दिया कि हाईटेक अपराधों से निपटने के लिए पुलिस भी हाईटेक हो चुकी है।

कानपुर पुलिस के इस 'ऑपरेशन जामताड़ा' ने पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा पैदा कर दी है। यह कार्रवाई न सिर्फ एक बड़े ठगी नेटवर्क को तोड़ती है बल्कि अन्य संभावित अपराधियों को भी सख्त संदेश देती है कि कानून के हाथ अब बहुत लंबे हो चुके हैं। तकनीक का गलत इस्तेमाल करने वाले अपराधी अब आसानी से नहीं बच पाएंगे।

(इनपुट- अनुराग श्रीवास्तव)

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